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बुधवार, 24 जून 2015

प्रधानमंत्री कार्यालय में अंग्रेजी का राज

माननीय प्रधानमंत्री हिंदी को वरीयता देते हैं पर उनके कार्यालय ("प्रमका") के अधिकारियों को राजभाषा हिन्दी से कोई लेना देना नहीं है इसलिए भारत सरकार द्वारा आरम्भ की आम जनता की योजनाओं की जानकारी केवल अंग्रेजी में जारी कर रहे हैं और स्वयं प्रमं के दृष्टिकोण को पलीता लग रहा है और हर योजना -राजकार्य में अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार के काम और योजनाओं की जानकारी/ऑनलाइन सुविधाएं हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में ना दिए जाने से योजनाएं तो फेल होंगी ही, सरकार की साख में सुधार भी नहीं होगा। 

शिकायत के प्रमुख बिंदु:

१. प्रधानमंत्री जी की वेबसाइट पूर्व निर्धारित रूप में (बाय डिफ़ॉल्ट) अंग्रेजी में खुलती है, वेबसाइट पर हिन्दी का विकल्प है पर वेबसाइट द्विभाषी नहीं है. जब मनमोहन सिंह प्रमं थे तब वेबसाइट का मुखपृष्ठ (होमपेज) 100 % द्विभाषी था और इस तरह हिंदी को प्राथमिकता दी गयी थी. प्रमका के अधिकारीगण से कहें कि मुखपृष्ठ 100 % द्विभाषी बनाया जाना चाहिए।
२. हिन्दी वेबसाइट होमपेज पर बैनर में 'भारत के प्रधानमंत्री' के बजाय 'PMINDIA' लिखा गया है.
३. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा अब तक हिंदी में विज्ञप्ति लिखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और पत्र सूचना कार्यालय से अंग्रेजी विज्ञप्ति के अनुवाद के लिए इंतज़ार किया जाता है, जो २-३ घंटे के बाद जारी हो पाता है. कई मामलों में किसी-किसी विज्ञप्ति का अनुवाद वेबसाइट पर कभी भी नहीं डाला जाता है. विज्ञप्ति मूल रूप से हिन्दी में तैयार करने के लिए निर्देश दें.
४. हिन्दी वेबसाइट की किसी पोस्ट पर 'टिप्पणी करें' विकल्प चुनने पर टिप्पणी लिखने का फॉर्म सिर्फ अंग्रेजी में होता है और उस फॉर्म में देवनागरी में नाम/पता/टिप्पणी स्वीकृत नहीं है. टिप्पणी लिखने के लिए सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए ईमेल सिर्फ अंग्रेजी में भेजा जाता है जबकि गूगल की सेवाओं की तरह ऐसे ईमेल और एसएमएस द्विभाषी (हिन्दी -अंग्रेजी) दोनों भाषाओं में भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए .
५. "प्रधानमंत्री को लिखें" विकल्प चुनने पर 'शिकायत पंजीकरण प्रपत्र' द्विभाषी खुलता है पर उसमें जिलों के नाम एवं 'शिकायत के विषय (श्रेणी) सिर्फ अंग्रेजी में हैं. 
६. हिन्दी वेबसाइट पर "हमारी सरकार" विकल्प के तहत अन्य नौ सरकारी वेबसाइटों को लिंक किया गया है उसमें संबंधित हिन्दी वेबसाइटों को लिंक किया जाना चाहिए ताकि वेबसाइट नाम पर क्लिक करने पर संबंधित हिन्दी वेबसाइट खुल जाए.
७. प्रमका ने ऑनलाइन प्रचार के लिए जो 'जनसम्पर्क एजेंसी नियुक्त की है वह नागरिकों को ईमेल सूचनाएँ /एसएमएस/ट्विटर अलर्ट/ ऑनलाइन विज्ञापन सिर्फ अंग्रेजी में भेजती है यह राजभाषा नियम 1976 एवं राजभाषा सम्बन्धी उन प्रावधानों का उल्लंघन है जिनमें यह कहा गया कि भारत सरकार नागरिकों को जनभाषा अथवा हिन्दी अथवा द्विभाषी रूप में पत्र लिखेगी। ईमेल पत्र की श्रेणी में आता है। जनता को ईमेल सिर्फ अंग्रेजी नहीं हिंदी-भारतीय भाषाओँ में भेजे जाने चाहिए। 
८. प्रमका की सोशल मीडिया टीम के अधिकारी  निरंतर राजभाषा की उपेक्षा कर रहे हैं, हिन्दी से सौतेला व्यवहार जारी है जबकि चीन की सोशल मीडिया साइट 'वेइबो' पर तो प्रमं के आधिकारिक खाते पर नाम/ परिचय/ताज़ा अपडेट मंदारिन (चीनी भाषा) में होते हैं पर भारत की जनता के लिए फेसबुक/ट्विटर/यू-ट्यूब/इंस्टाग्राम पर नाम-परिचय द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) ना होकर सिर्फ #अंग्रेजी में है. इन पर हिन्दी में अपडेट एक महीने में 1-2 बार ही होता है जबकि नियमित अपडेट बारी-२ से द्विभाषी रूप में डाले जाने चाहिए ताकि अंग्रेजी ना जानने वाले #भारत के नागरिक भी इनका उपयोग कर सकें। नाम-परिचय भी द्विभाषी लिखने से राजभाषा हिन्दी को उसका सम्मान और स्थान मिल जाएगा। ऐसा करने में प्रमका का कोई परेशानी नहीं होगी, बस निर्देश दिए जाने की आवश्यकता है.
९. प्रमका की वेबसाइट का डोमेन नाम देवनागरी में पंजीकृत करवाएँ और विज्ञापनों में उसका प्रयोग किया जाए। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्तियाँ भारत की प्रमुख भाषाओं में वेबसाइट पर डाली जानी चाहिए। 
१०. प्रमका ने 'माई गव' वेबसाइट के लिए चिह्न में हिन्दी को अंग्रेजी के अक्षरों के नीचे रखा है जबकि हिन्दी ऊपर होनी चाहिए। 'माई गव' वेबसाइट का हिंदी संस्करण आधा अधूरा है और माई गव वेबसाइट के 90 % पृष्ठ केवल अंग्रेजी में खुलते हैं। पंजीकरण और फीडबैक में देवनागरी के अक्षर लिखने पर अंग्रेजी में सन्देश आता है ' इनवैलिड कैरेक्टर्स, उस ओन्ली अल्फावेट्स'
११. जनता द्वारा हिंदी में लिखे गए पत्रों  के जवाब प्रमका से अंग्रेजी में दिया जाता है।  ताज़ा उदाहरण 'भारतीय भाषा आंदोलन' के ज्ञापन का है, भारतीय भाषाओँ के लिए आंदोलन कर रहे लोगों के ज्ञापन का जवाब भी अंग्रेजी में दिया गया जो बेहद शर्मनाक बात है। 

शुक्रवार, 6 जून 2014

मैंने पूछे प्रधानमंत्री कार्यालय से ये प्रश्न, आप भी पूछ सकते हैं.

हम जाँचना चाहते हैं कि राजभाषा के सम्मान व राजभाषा को प्रोत्साहन देने हेतु प्रधानमन्त्री कार्यालय (प्रमका) कितना सजग व तत्पर है अतः निम्न प्रश्न जन सूचना अधिकार के अंतर्गत पूछे जाते हैं, कृपया 30 दिनों के अंदर हिन्दी में उत्तर दें:
1.       प्रमका में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में विगत वर्ष 2013-14 में कितनी स्टाफ की बैठकें हुईं?
2.       क्या उनमें राजभाषा में कामकाज करने संबंधी विषय आया? यदि हाँ, तो उस संबंध में हुई चर्चा और निर्णय की प्रतियाँ उपलब्ध कराएँ । यदि नहीं तो बताएँ कि 01-04-2011 से 31-03-2014 तक राजभाषा के नियम- अनुपालन संबंधित कितनी बार चर्चा हुई तथा इसके निर्णय व कार्यान्वयन का क्या-२ विवरण मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को दिया गया?
3.       प्रमका में निदेशक अथवा उससे उच्च श्रेणी के कितने अधिकारी हैं – सूची दें। उनमें से किस किस को हिन्दी टंकण की  अत्यंत सुविधापूर्वक आदर्श प्रणाली अर्थात् इनस्क्रिप्ट प्रणाली की जानकारी है, नाम बतायें।
4.       वरिष्ठ अधिकारियों की हिन्दी संबंधी जागरुकता व ज्ञान बढ़ाने हेतु प्रमका ने विगत पाँच वर्षों में कितनी बार अपने किस-२ अधिकारी को प्रशिक्षण के लिये भेजा, नाम, पदनाम सहित सूची दें।
5.       प्रमका के कामकाज में राजभाषा को प्रोत्साहन देने हेतु प्रमका का अगले पाँच वर्षों के लिये दृष्टिकोण-पत्र (विज़न-डॉक्यूमेंट) क्या है?
6.       प्रमका में कार्यरत कर्मचारी/ अधिकारियों के परिचय-पत्र (आई-कार्ड) किस भाषा में बनाए गए हैं, एक नमूना उपलब्ध करवाएँ?
7.       प्रधानमन्त्री कार्यालय परिसर में लगे हुए सूचना-पट्ट (जैसे–मुख्य-द्वार/प्रवेश/निकास/पेयजल/प्रसाधन/स्वागत कक्ष आदि) एवं नाम-पट्ट किस भाषा में बनाए गए हैं, एक नमूना उपलब्ध करवाएँ?
8.       प्रधानमन्त्री कार्यालय में किस-किस भाषा के कौन-२ से समाचार-पत्र मँगाए जाते हैं, सूची दें?
9.       प्रमका की नयी वेबसाइट पर निम्न कमियाँ पायी गयीं हैं:
(क).       भारत की राजभाषा हिन्दी है फिर भी उसकी उपेक्षा करते हुए प्रमका की वेबसाइट अंग्रेजी में पहले (बाई-डिफ़ॉल्ट) किस नियम/आदेश से खुलती  है, जबकि देश में अंग्रेजी जानने वाले नागरिक मात्र 5 % हैं और हिन्दी जानने वाले 80%?
(ख).      ‘प्रधानमन्त्री के साथ बातचीत करें’ फॉर्म में हिन्दी फॉण्ट स्वीकार नहीं किये जाते हैं, उन्हें प्रतिबंधित किया गया है.
(ग).       अंग्रेजी वेबसाइट तुरंत अद्यतित की जाती है जबकि हिन्दी वेबसाइट कई घंटों बाद.
(घ).       प्रधानमन्त्री को भेजे ईमेल अथवा ऑनलाइन-पत्र की प्राप्ति-स्वीकृति(एक्नोलेजमेंट) केवल अंग्रेजी में ही भेजी जाती है जो राजभाषा नियम १९७६ का उल्लंघन है.
(ङ).        प्रमका के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक खातों पर परिचय हिन्दी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा जाना चाहिए और अपडेट्स भी दोनों भाषाओं में बारी-२ से डाले जाने चाहिए ताकि प्रधानमन्त्री जी के निर्णयों/निर्देशों/विचारों की जानकारी आम जनता तक जनभाषा में सीधे पहुँच सके.
(च).       वेबसाइट पर दिनांक में महीनों के नाम केवल रोमन(अंग्रेजी) (May 25, 2014, May 28, 2014 अथवा June 02, 2014) में प्रदर्शित होते हैं और उनमें राष्ट्रीय पंचांग (शक संवत्) की भी उपेक्षा की गई है. राष्ट्रीय पंचांग (शक संवत्) की तिथियों का भी उल्लेख किया जाना चाहिए अन्यथा यह विलुप्त हो जाएगा.
इन कमियों (क) से (च) को कब दूर किया जाएगा? इस सम्बन्ध में नियमानुसार सुधार हेतु आम नागरिक किस सक्षम अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं?
10. नए मंत्रिमंडल की बैठकों में प्रयोग होने वाली मंत्रियों के नाम-मंत्रालय के नाम वाली मेज-पट्टिकाएँ किस भाषा में बनाई जाती हैं, एक नमूना उपलब्ध करवाएँ?


आवेदक:
प्रवीण जैन