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शनिवार, 4 अप्रैल 2020

किरीटविषाणु अर्थात् कोरोनावायरस


आज का हिन्दी शब्द

किरीटविषाणु अर्थात् कोरोनावायरस 

कोरोना लैटिन भाषा का शब्द है जिसे सबसे पहले सोलहवीं सदी के मध्य में प्रयोग किया गया था, इसका अर्थ मुकुट होता है।

वायरस शब्द भी लैटिन शब्द है जो वैनम (Venom) से आया है और वैनम का अर्थ विष होता है इसलिए हिन्दी में वायरस के लिए विषाणु सर्वथा उपयुक्त व सरल पर्यायवाची है।

वर्तमान में जो वैश्विक महामारी फैली है, वह एक विषाणु (विष+अणु) के कारण फैल रही है, यह जीवाणु, कीटाणु की भाँति ही जीव है और इस विषाणु का रूपाकार भी कुछ-कुछ लैटिन देशों में सोलहवीं सदी में उपयोग किए गए मुकुट से मिलता जुलता है।

1968 में वैज्ञानिकों ने सबसे पहले इस विषाणु को सूक्ष्मदर्शी यंत्र पर देखा तो यह सौर किरीट के जैसा दिखाई दिया, सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का किरीट निर्मित होता है। यथा-

कोरोना का  प्रथमाक्षर लेकर हिन्दी में मुकुट के लिए किरीट पर्यायवाची उपलब्ध है, अतः भारतीय भाषाओं के विद्वतजनों ने कोरोनावायरस के लिए किरीटविषाणु पर्याय सुझाया है।

किरीटविषाणु विषाणुओं का एक परिवार है। कोविड-19 उनमें सबसे नया है, इसे सार्स कॉव-2 भी कहते हैं।

कोविड-19 नाम भी रोचक है, इस रोग का पहला प्रकरण चीन में 2019 में मिला था, और यह किरीटविषाणु परिवार का सबसे नया विषाणु है इसलिए वर्ष का द्योतक 19 है और अंग्रेजी के CO-rona-VI-rus D-isease का संक्षेप कोविड हो गया।

इस हिसाब से हम भी इसे किरीट-विषाणु-रोग अर्थात् किविरो कह सकते हैं, ठीक कहा न?

@praveenvidhi




बुधवार, 1 अप्रैल 2020

भारत में किरीट विषाणु संक्रमण- अंग्रेजी में उलझे आम नागरिक


प्रिय महोदय !
मेरे गाँव के अनेक लोगों के फोन आये और प्रायः सभी ने कोरोना विषाणु द्वारा फैली महामारी के सम्बन्ध में चर्चा की। कुछ लोग यह भी कह रहे थे कि भैया हम लोग तो गाँव के हैं हमें ज्यादा पढ़ें -लिखे साहब लोगों की बातें समझ में नहीं आतीं ।

यद्यपि वे सब हमारे देश के आ. प्रधानमन्त्री जी की मुक्त कंठ से प्रशंसा भी करते हैं और कहते हैं कि अकेले मोदीजी की बातें ही हम अच्छी तरह समझ जाते हैं क्योंकि वे हम सबको अपना समझकर समझाते हैं । उनके बोलने से हमें ऐसा लगता है जैसे हमारे बीच का कोई हमें जानकारी दे रहा है।           

सबकी लगभग एक ही चिंता थी कि चैनलों पर विशेषज्ञ, डाक्टर आदि जो समझाते हैं वे ऐसी भाषा या ऐसे शब्दों का अधिक प्रयोग करते हैं जिसका अर्थ निकालना बड़ा कठिन सा लगने लगता है।  उनके बोलने से ऐसा लगता है जैसे वे सब अपनी औपचारिकता ही पूरी करने आये हों। समझाते कम, डरवाते ज्यादा हैं। हम लोग तो इन शब्दों का उच्चारण भी नहीं कर पाते हैं।  कुछ ने मुझसे पूछा इस रोग का सही नाम क्या है करोना, कैरोना, कैराना, कारोना, कोरना या कुराना । क्या इस बीमारी का कोई देसी नाम नहीं है?

उन्होंने अपने उच्चारण में कुछ शब्द बताए, हर व्यक्ति ने 5-6 कठिन अंग्रेजी शब्द बताए हैं, जिनमें से कुछ हमने लिख लिये हैं। ग्रामीण लोग जिन शब्दों से चकरा जाते हैं उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं -
कोरोना,
वाइरस,
कोविड-नाइनटीन,
इम्यूनिटी ,
लाकडाउन ,
क्वारेन्टाइन ,
आइसोलेशन ,
सेनेटाइजर ,
सेनिटेशन ,
सोशल डिस्टेंस ,
इमोशनल डिस्टेंस ,
पाजिटिव,
हैल्पफुल
फारेंन असिस्टेंस
लंच-डिनर
मेमोरेंडम
फुल सपोर्ट
निगेटिव ,
हाइजीन ,
कोरोना वारियर्स,
वायरस,
एनएच- ट्वेंटीफोर,
हैंडवाश,
प्री-काशन,
मिनिमम,
सैलरी,
रिसर्च,
कंटीन्युअस टच
ग्लव्स
आर एंड डी
प्रोटेक्शन गियर्स
फूड सप्लाई
ईएमआई
फायनेंस सपोर्ट
डीएम,
फ्यूमिगेशन,
फालो,
फूड,
ट्रैवल हिस्ट्री,
इन्फैक्शन,
ब्लैक आउट,
लैब टैस्टिंग,
इन्वेटीगेशन,
वर्क फ्रॉम होम,
हैल्थ एक्सपर्ट,
हैल्थ इंश्योरेंस,
ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स
डीबीटी
लाइव अपडेट
एक्सक्लूसिव
एम्पलाई
पीएमओ,
हैल्थ मिनिस्ट्री,
ब्लड टैस्ट,
करेंट स्टेटस,
वैलनेस
एसेंशियल गुड्स
एसेंशियल सर्विस
शेल्टर
माइग्रेट लेबर
हैल्पफुल
मेज़र्स
लेटेस्ट
अपडेट्स
डीएम
आर एंड डी
कंट्रीब्यूशन
कांस्टेंट


अत: कोरोना सम्बन्धी चर्चा करते समय पत्रकार वार्ताओं व टी.वी. चैनलों पर भारत सरकार के प्रवक्ता आदि एवं सभी विशेषज्ञ और समाचार वाचक पढ़े-लिखे लोगों के साथ-साथ सामान्य ग्रामीणों-किसानों को दृष्टि में रखकर अपनी भाषा में उपलब्ध पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग करें, जिसे सब आत्मसात कर सकें।

महानगरों की हिन्दी में बहुतायत अंग्रेजी के शब्द होते हैं पर अभी छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इन शब्दों को समझ ही नहीं पाते हैं।  हम अनजाने में हिन्दी भाषा में अंग्रेजी व हिन्दी शब्दावली के आधार पर अमीर-गरीब की एक और नयी विभाजन रेखा तो नहीं खींच रहे हैं?

यह किसी की आलोचना नहीं, केवल निवेदन है।

--डा. रघुवीर गोस्वामी, भोपाल।


किरीट विषाणु संबंधी शब्दावली


कोरोना विषाणु-सही जानकारी ही बचाव है
परंतु केवल अंग्रेजी में जानकारी देना घातक है!
हिन्दी टीवी समाचारों व समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में कुछ अनसुने व कठिन अंग्रेजी शब्द लगातार चलाए जा रहे हैं उनके हिन्दी पर्यायवाची अथवा अर्थ-
1.        वायरस- विषाणु
2.   क्वारेंटीन-क्वारेंटाइन- संगरोध, अकेला रखना
3.       वैलनेस सेंटर- स्वास्थ्य केंद्र
4.       आइसोलेट- पृथक, अलग करना
5.       आइसोलेशन वार्ड- पृथक्करण कक्ष, विलगीकरण कक्ष
6.       सोशल डिस्टेंशिंग – शारीरिक   दूरी, आपसी दूरी
7.       सेनिटाइज- स्वच्छ करना, निर्जंतुकरण
8.       सेनिटाइज़िंग- निर्जंतुकरण, जीवाणु-विषाणु मुक्त करना
9.       इन्फेक्शन- संक्रमण
10.    स्प्रैड- फैलना
11.      लॉक डाउन- तालाबंदी
12.    सलाइबा- लार
13.     ब्लैक आउट- पूरी तरह अंधेरा, बंद करना
14.    लैब टैस्टिंग- प्रयोगशाला परीक्षण
15.    इन्वेटीगेशन- जाँच
16.    वर्क फ्रॉम होम- घर से काम
17.     पॉजिटिव- सकारात्मक नमूना, रोग की पुष्टि
18.    हैल्थ एक्सपर्ट- स्वास्थ्य विशेषज्ञ
19.    हैल्थ इंश्योरेंस- स्वास्थ्य बीमा
20.   मास्क- मुख पट्टी
21.    ग्लब्स- दस्ताने
22.   कंट्रोल-नियंत्रण
23.   ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स- मंत्री समूह
24.   पीएमओ- प्रधानमंत्री कार्यालय
25.   हैल्थ मिनिस्ट्री- स्वास्थ्य मंत्रालय
26.   ब्लड सैंपल- रक्त नमूना
27.   करेंट स्टेटस- ताजा स्थिति
A disaster becomes disastrous when communication with public is done in language which they can’t understand/read.
#EnglishApartheid

रविवार, 29 मार्च 2020

क्या कोरोना विषाणु सिर्फ अंग्रेजी जानने वालों को प्रभावित करता है?

मुंबई. 25 मार्च 2020.


भारत सरकार के विभाग किसी आपदा को भी अंग्रेजी के विस्तार और विकास के मौके की तरह इस्तेमाल करते हैं। इस संबंध में एक जागरुक व सामाजिक कार्यकर्ता विधि जैन ने स्वास्थ्य मंत्रालय, लोक सभा अध्यक्ष, उपराष्ट्रपति व राष्ट्रपति को पत्र में कहा है कि सरकार के संवेदना शून्य अधिकारी अंग्रेजी की गुलामी में इतने मस्त हैं कि भयावह रोग से नागरिकों के बचाव में भी भाषाई भेदभाव कर रहे हैं।

कोरोना विषाणु से भारत में भी लोगों की मौत और उसके चपेट में आने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसी भी साधारण इंसान को सावधानी बरतने के लिए लगता है कि उसे भी कोरोना विषाणु और उसके चपेट में आने के लक्षणों को जान लेना चाहिए। लेकिन वह इसके लिए कहां जाए?

सीधा सा जवाब मिलता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर अवश्य जवाब मिलेगा। विधि जैन मध्यम वर्ग की एक महिला हैं। उन्होंने भी भरोसा किया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर कोरोना विषाणु के बारे में और उसके खतरे के बारे में जरूर जानकारी मिलेगी। लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने पूरी वेबसाइट खंगाल मारी ताकि उन्हें कोरोना विषाणु के खतरों के बारे मे पढ़ने और सुनने को मिल सकेलेकिन सिर्फ निराशा मिली।

दरअसल विधि जैन एक सक्रिय भारतीय भाषासेवी हैं और पिछले 10 वर्षों से जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा से भारतीय भाषाओं के लिए निरंतर संघर्ष कर रही हैं। जब उन्होंने वेबसाइट खंगाला तो उन्हें वहां हिंदी में आधिकारिक जानकारियां नहीं मिली। हालांकिकहने को हिंदी भारत सरकार की राजभाषा है। इस अनुभव के बाद विधि जैन ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि क्या कोरोना विषाणु केवल अंग्रेजी जानने वालों को होता हैक्या भारत में कोरोना विषाणु उन्हें चपेट में नहीं लेता हैजो अपने देश की भाषाओं को जानते हैं?

विधि जैन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव को एक पत्र लिखकर ये सवाल पूछे हैं। उसमें उन्होंने संयुक्त सचिव को यह जानकारी दी है कि स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर कोरोना विषाणु के संबंध में नागरिकों को जो भी सुझावसलाह और निर्देश दिए गए हैंवे केवल अंग्रेजी में ही हैं। आखिर ऐसा क्योंविधि जैन ने वेबसाइट पर कोरोना से संबंधी जितने भी लिंक दिए गए हैंवो भी मंत्रालय को भेजा है।
इनमें केवल एक पोस्टर है जिसमें बताया गया कि कोरोना विषाणु से बचाव के लिए क्या करें और क्या नहीं करना चहिए। वे लिखती हैं कि, “मंत्रालय की वेबसाइट पर कोरोना विषाणु से संबंधित जानकारी केवल अंग्रेजी में दी गई हैमंत्रालय की प्रेस विज्ञप्तियां और दस्तावेज केवल अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं। यात्रा परामर्श अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं। क्या जिनको अंग्रेजी नहीं आती हैवे लोग कोरोना विषाणु से संक्रमित नहीं होंगेइसलिए मंत्रालय के अधिकारी केवल अंग्रेजी में सूचनाएं जारी कर रहे हैं?

कोरोना विषाणु के चपेट में आने वालों की संख्या ज्यों ज्यों बढ़ रही हैभारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन हैरानी है कि वे सभी आधिकारिक सूचनाएँ, आदेश, विज्ञप्तियाँ अंग्रेजी में ही दिए जा रहे हैं। महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड के एक उपभोक्ता ने बताया कि मार्च से मार्च के बीच उन्हें कोरोना विषाणु के संबंध में चार एसएमएस मिले। लेकिन उनमें क्या लिखा है उन्हें समझना मुश्किल है क्योंकि वे सभी के सभी अंग्रेजी में हैंजो कि उन्हें अच्छी तरह नहीं आती है। किसी ऐसे संदेश को समझ लेना असंभव है। भारत सरकार के ही एक अन्य विभाग ने एक संदेश भेजा है, वह भी अंग्रेजी में है।
दरअसल भारत सरकार के विभाग किसी आपदा को भी अंग्रेजी के विस्तार और विकास के मौके की तरह इस्तेमाल करते हैं। विधि जैन ने अपने पत्र में लिखा है, “भारत सरकार के संवेदना शून्य अधिकारी अंग्रेजी की गुलामी में इतने मस्त हैं कि इस भयावह रोग से नागरिकों के बचाव में भी भाषाई भेदभाव कर रहे हैंसारी मशीनरी अंग्रेजी जानने वाले संभ्रांत लोगों के लिए काम कर रही हैयह शर्मनाक है।”

भारत में कोरोना विषाणु के तेजी से फैलने की लगातार खबरें आ रही हैंलेकिन हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी कोरोना विषाणु से संबंधित जानकारियों और चेतावनी  संदेशों का घोर अभाव हैं। केवल भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं बल्कि राज्य सरकारों की तरफ से भी लोगों को उनकी भाषाओं में कोरोना से जुड़ी सलाह और जानकारियाँ नहीं मिल रही हैं।

कोरोना जैसी महामारी पैर पसार रही है परंतु भारत सरकार के सभी मंत्रालयविभाग और संस्थान राजभाषा अधिनियम 1963 का उल्लंघन करते हुए प्रेस नोटआदेश व अधिसूचनाएँ केवल अंग्रेजी में जारी कर रहे हैंगत् 60 दिनों में कोरोना के संबंध में भारत सरकार के किसी भी मंत्रालयविभाग और संस्थान ने हिन्दी में एक भी आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया। 

विधि जैन ने बताया कि मैं इस संबंध में लगातार शिकायत कर रही हूँ पर अधिकारियों को आम जनता की शिकायतों से कोई लेना-देना नहीं है। लोक शिकायत पोर्टल पर 8 मार्च 2020 की शिकायत क्र. डीएचएलटीएच//2020/01519, प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई 16 मार्च 202 की शिकायत क्र. पीएमओपीजी//2020/0127172,  राजभाषा विभाग के 23 मार्च 2020 के पत्र और राष्ट्रपति सचिवालय को दायर की गई 25 मार्च 2020 की याचिका क्र. पीआरएसईसी//2020/06079 पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अंग्रेजी न जानने वाले 97 प्रतिशत भारतीय नागरिकों के बीच गलत सूचनाएँ व अफवाहें फैल रही हैं। 

विधि जैन व अनेक नागरिकों की लगातार शिकायतों के 16 दिनों बाद राजभाषा विभाग के एक अधिकारी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखा है। परंतु स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभी भी हिन्दी में सूचनाएँ जारी करना प्रारंभ नहीं किया है।