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बुधवार, 9 जुलाई 2014

संघ लोक सेवा आयोग: सीसैट का विरोध, आमरण अनशन पर बैठे छात्र

संघ लोक सेवा आयोग में सीसैट का विरोध कर रहे छात्रों को संबोधित करते राजनीतिक विश्लेषक वेद प्रकाश वैदिक।
नई दिल्ली. ८ जुलाई २०१४ (नवभारत टाइम्स के सौजन्य से)
संघ लोक सेवा आयोग (संलोसेआ)  में हिन्दी के साथ भेदभाव खत्म करने और सीसैट को हटाने को लेकर छात्रों का विरोध दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। विरोध जताने के क्रम में मुखर्जी नगर में 50 से अधिक सिविल के छात्र 6 जुलाई से ही आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। इनमें करीब 20 लड़कियां भी शामिल हैं। 
हैरत की बात यह है कि अभी तक सरकार की ओर  से कोई प्रतिनिधि अनशन पर बैठे छात्रों से बात करने तक नहीं आया है। इससे पहले भी करीब 15000 छात्र 27 जून को अपनी मांगों को लेकर रेसकोर्स भी गए थे, वहां सारी रात बैठे रहे लेकिन सरकार की ओर  से न तो कोई प्रतिनिधि इनकी बातों को सुनने आया न ही किसी प्रकार का आश्वासन ही उन्हें मिला। 
छात्रो की मांग है कि बदलाव के बाद प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को हटाया जाए जिसका सीधा लाभ इंजीनियरी  और प्रबंधन के छात्रों को मिल रहा है। कई बार प्रदर्शन कर चुके इन छात्रों का कहना है कि अब उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं हैं क्योंकि हमारी बातों को कहीं नहीं सुना जा रहा है। 
इन छात्रों की संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा 24 अगस्त को है। छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान संघ लोक सेवा आयोग ने अपने पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किया है जिससे ग्रामीण और मानविकी  पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ हिन्दी माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों के चयन में नाटकीय रूप से गिरावट दर्ज की गई है। अब हाल यह हो गया है कि 2013 के संघ लोक सेवा आयोग के रिजल्ट में 1122 लोगों का चयन हुआ है जिसमें हिन्दी माध्यम के छात्रों की संख्या केवल 26 है। 
चयन में इस गिरावट के लिए छात्र यूपीएसी की अंग्रेजी परस्ती को और प्रारंभिक परीक्षा में शामिल किए गए सीसैट को जिम्मेदार मान रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग की तौयारी कर रहे छात्र दुष्यंत का कहना है कि सीसैट के कारण इंजीनियरी  और प्रबंधन के छात्रों काफी लाभ मिल रहा है जबकि मानविकी एवं हिन्दी माध्यम के छात्र इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 
संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी करने वाले छात्र अतहर कहते हैं कि यही वजह है कि हम सीसैट को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग कर रहे हैं। अतहर ने कहा, 'हमारी मांग है कि मुख्य परीक्षा में जो अंग्रेजी अर्हता का प्रश्न पत्र है उसे भी अन्य भारतीय भाषाओं के स्तर का बनाया जाए।
जबकि एक और छात्र सम्पूर्णानंद कहते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग के प्रश्न जो मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किये जाते हैं उसका हिन्दी अनुवाद काफी जटिल और कई जगहों पर गलत भी होता है। हमारी मांग यह है कि मूल प्रश्न पत्र हिन्दी में ही तैयार किए जाएं। छात्रों की मानें तो साक्षात्कार में भी हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के छात्रों को अंग्रेजी बोलने के लिए बाध्य किया जाता है। छात्र प्रारंभिक परीक्षा की तिथि को भी आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं क्योंकि आंदोलन और अनशन की वजह से उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

मंगलवार, 13 मई 2014

हिन्दी चैनल वालो! हिन्दी में 'राजग' होता है, 'एनडीए' अथवा 'NDA' को अंग्रेजी चैनलों के पास ही रहने दो

राजनीतिक दल/गठबंधन/संगठन :
राजग: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन [एनडीए]संप्रग: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन [यूपीए]तेदेपा: तेलुगु देशम पार्टी [टीडीपी]अन्ना द्रमुक: अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम[ अन्ना डीएमके]द्रमुक: द्रविड़ मुनेत्र कषगम [डीएमके]भाजपा: भारतीय जनता पार्टी [बीजेपी]रालोद : राष्ट्रीय लोक दल [आरएलडी]बसपा: बहुजन समाज पार्टी [बीएसपी]मनसे: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [एमएनएस]माकपा: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [सीपीएम]भाकपा: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [सीपीआई]राजद: राष्ट्रीय जनता दल [आरजेडी]बीजद: बीजू जनता दल [बीजेडी]तेरास: तेलंगाना राष्ट्र समिति [टीआरएस]नेका: नेशनल कॉन्फ्रेन्सराकांपा : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [एनसीपी]अस: अहिंसा संघअसे: अहिंसा सेनागोजमुमो:गोरखा जन मुक्ति मोर्चाअभागोली:अखिल भारतीय गोरखा लीगमगोपा:महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी [एमजीपी]पामक : पाटाली मक्कल कच्ची [पीएमके]
गोलिआ:गोरखा लिबरेशन आर्गेनाइजेशन [जीएलओ]

हिंदी संक्षेपाक्षर सदियों से इस्तेमाल होते आ रहे हैंमराठी में तो आज भी संक्षेपाक्षर का प्रयोग भरपूर किया जाता है और नये-२ संक्षेपाक्षर बनाये जाते हैं पर आज का हिंदी मीडिया इससे परहेज़ कर रहा हैदेवनागरी के स्थान पर रोमन लिपि का उपयोग कर रहा है. साथ ही मीडिया हिंदी लिपि एवं हिंदी संक्षेपाक्षरों के प्रयोग को हिंदी के प्रचार में बाधा मानता हैजो पूरी तरह से निराधार और गलत है.मैं ये मानता हूँ कि बोलचाल की भाषा में हिंदी संक्षेपाक्षरों की सीमा है पर कम से कम लेखन की भाषा में इनके प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए और जब सरल हिंदी संक्षेपाक्षर उपलब्ध हो या बनाया जा सकता हो तो अंग्रेजी संक्षेपाक्षर का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.मैं अनुरोध करूँगा कि नए-नए सरल हिंदी संक्षेपाक्षर बनाये जाएँ और उनका भरपूर इस्तेमाल किया जायेमैं यहाँ कुछ हिंदी संक्षेपाक्षरों की सूची देना चाहता हूँ जो हैं तो पहले से प्रचलन में हैं अथवा इनको कुछ स्थानों पर इस्तेमाल किया जाता है पर उनका प्रचार किया जाना चाहिएआपको कुछ अटपटे और अजीब भी लग सकते हैंपर जब हम एक विदेशी भाषा अंग्रेजी के सैकड़ों अटपटे शब्दों/व्याकरण को स्वीकार कर चुके हैं तो अपनी भाषा के थोड़े-बहुत अटपटे संक्षेपाक्षरों को भी पचा सकते हैं बस सोच बदलने की ज़रूरत है.हिंदी हमारी अपनी भाषा हैइसके विकास की ज़िम्मेदारी हम सब पर है और मीडिया की ज़िम्मेदारी सबसे ऊपर है.

हमारी खीज और गुस्सा बढ़ गया हैदुःख भी हो रहा है कि हमारी भाषा के पैरोकार की उसे दयनीय और हीन बना रहे हैंवो भी बेतुके बाज़ारवाद के नाम पर. आप लोग क्यों नहीं समझ रहे कि हिंदी का चैनल अथवा अखबार हिंदी में समाचार देखने/सुननेपढ़ने  के लिए होता है ना कि अंग्रेजी के लिएउसके लिए अंग्रेजी के ढेरों अखबार और चैनल हमारे पास उपलब्ध हैं.

मैं इस लेख के माध्यम से इन सारे हिंदी के खबरिया चैनलों और अखबारों से विनती करता हूँ कि हिंदी को हीन और दयनीय बनाना बंद कर दीजियेउसे आगे बढ़ने दीजिये.मेरा विनम्र निवेदन:
१. हिंदी चैनल/अखबार/पत्रिका अथवा आधिकारिक वेबसाइट में अंग्रेजी के अनावश्यक शब्दों का प्रयोग बंद होना चाहिए.२. जहाँ जरूरी हो अंग्रेजी के शब्दों को सिर्फ देवनागरी में लिखा जाए रोमन में नहीं.३. हिंदी चैनल/अखबार/पत्रिका अथवा आधिकारिक वेबसाइट में हिंदी संक्षेपाक्षरों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.