अनुवाद

अन्याय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अन्याय लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 25 जून 2013

क्या करेंगे आप जब केन्द्रीय सूचना आयोग ही हिंदी में नहीं देता कोई जवाब?

दिनांक: २३ जून 2013  

प्रति,
केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी, 
केन्द्रीय सूचना आयोग , भारत सरकार
अगस्त क्रांति भवन, भीकाजी कामा महल, नई दिल्ली - ११००६६ 

विषय: सूचना का अधिकार 2005 के अधीन सूचना प्राप्त हेतु.

महोदय,
उपर्युक्त विषयान्तर्गत निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में प्रदान करने की कृपा करें:
1)     केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्यालय में राजभाषा अनुपालन की क्या स्थिति है?
2)     क्या केन्द्रीय सूचना आयोग ने हिन्दी सलाहकार समिति अथवा राजभाषा कार्यान्वयन समिति गठित की है? ऐसी समिति की पिछले एक वर्ष की बैठकों का विवरण प्रदान करें.
3)     केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्यालय में राजभाषा अनुपालन के लिए कितने अधिकारी नियुक्त किए गए हैं उनका विवरण क्या है?
4)     केन्द्रीय सूचना आयोग के सामाजिक माध्यमों (ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब, पिंटरेस्ट, ब्लॉग आदि) के आधिकारिक पतों की जानकारी दें और बताएँ कि ये किस-२ तिथि को शुरू किए गए? एवं इन पर जानकारी किस भाषा में डाली जाती है?
5)     केन्द्रीय सूचना आयोग ने अपनी मुख्य वेबसाइट एवं सीआईसी ऑनलाइन की वेबसाइट http://rti.india.gov.in/ कब (दिनांक) और किस भाषा में शुरू की गई थी?
6)     केन्द्रीय सूचना आयोग ने सीआईसी ऑनलाइन की वेबसाइट http://rti.india.gov.in/ कब (दिनांक) हिन्दी में शुरू की थी?
7)     केन्द्रीय सूचना आयोग की सीआईसी ऑनलाइन की वेबसाइट http://rti.india.gov.in/ का मुख्य बैनर अभी केवल अंग्रेजी में बनाया गया है उसे कब हिन्दी में बनाया जाएगा ?
8)     केन्द्रीय सूचना आयोग की नागरिक सेवा वेबसाइट http://www.rti.gov.in/ एवं सीआईसी ऑनलाइन की वेबसाइट http://rti.india.gov.in/ की राजभाषा में उपलब्धता, नवीनतम एवं त्रुटिविहीन जानकारी के कौन अधिकारी उत्तरदायी है, उनका नाम/पता/ईमेल सहित पूरा विवरण प्रदान करें?
9)     केन्द्रीय सूचना आयोग की मुख्य वेबसाइट http://cic.gov.in/ हिन्दी में उपलब्ध नहीं है, हिन्दी वेबसाइट कब आरंभ होगी?
10)   नागरिक सेवा वेबसाइट http://www.rti.gov.in/ का हिन्दी संस्करण आधा-अधूरा है और यह वेबसाइट समय-२ पर अद्यतन नहीं की जा रही है. कई पृष्ठों पर क्लिक करने पर अंग्रेजी वेबसाइट के पृष्ठ अथवा अंग्रेजी पीडीएफ फाइलें खुल जाती हैं, कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ हिन्दी में उपलब्ध नहीं हैं, उपलब्ध हिन्दी सामग्री में वर्तनी की ढेरों त्रुटियाँ भी हैं, मुखपृष्ठ पर भी त्रुटियाँ है. इन सभी कमियों को कब तक दूर कर लिया जाएगा? इसकी क्या योजना है
11)   चूँकि हिन्दी भारत सरकार की राजभाषा है फिर भी केन्द्रीय सूचना आयोग सीआईसी ऑनलाइन की वेबसाइट http://rti.india.gov.in/ एवं http://www.rti.gov.in/ मूलरूप से अंग्रेजी में खुलती हैं नाकि हिन्दी में. ऐसा किस नियम/प्रावधान/निर्णय/आदेश के अधीन किया जा रहा है, उसकी प्रति उपलब्ध करवाएँ?
12)   नागरिक सेवा वेबसाइट http://www.rti.gov.in/ की हिन्दी वेबसाइट पर १००% सामग्री हिन्दी में कब उपलब्ध होगी?
13)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा हिन्दी में प्राप्त अपीलों एवं शिकायतों के निर्णय/आदेश किस भाषा में जारी किए जाते हैं?
14)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा पिछले एक वर्ष में आरटीआई सम्बन्धी कितने निर्णय/आदेश हिन्दी में जारी किए, विवरण दें?
15)   किस नियम/प्रावधान/अधिनियम के अनुसार १२वीं पंचवर्षीय योजना अंग्रेजी भाषा में पहले जारी की गई, उसकी प्रति उपलब्ध करवाएँ?
16)   केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्यालय में प्रयोग में लाये जा रहे पत्र-शीर्ष, लिफाफे, रबर की मुद्राएँ, अधिकारियों के नामपट, फाइल आवरण पर विवरण, दिशा-सूचक निर्देश (साइनेज) आदि किस भाषा में बनाये गए हैं?
17)   केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्यालय में प्रयोग में लाये जा रहे ऐसे पत्र-शीर्ष, लिफाफे, रबर की मुद्राएँ आदि का विवरण प्रदान करें जो केवल अंग्रेजी में हैं?
18)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा जारी की जाने वाली प्रेस-विज्ञप्तियाँ मूल रूप से किस भाषा में जारी की जाती हैं, इस सम्बन्ध में क्या नियम हैं?
19)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा पिछले एक वर्ष में कितनी प्रेस विज्ञप्तियाँ हिन्दी में जारी की गईं?
20)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा गत ३ वर्षों में कितने समारोह/सम्मेलन/प्रेस सम्मेलन आयोजित किए गए? इनमें से कितने कार्यक्रमों के आमंत्रण-पत्र, बैनर, पोस्टर केवल अंग्रेजी में बनाये गए?
21)   आगे यह भी बताएँ कि इनमें से कितने कार्यक्रमों में मुख्य-अतिथियों के नाम की मेज पट्टिका (टेबल नेम प्लेट) केवल अंग्रेजी में बनाई गई?
22)   केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा गत ३ वर्षों में आयोजित उन समारोह/सम्मेलन/प्रेस सम्मेलन आदि का विवरण दें जिनके आमंत्रण-पत्र, बैनर, पोस्टर, बिल्ले आदि हिन्दी अथवा द्विभाषी (हिन्दी –अंग्रेजी) में बनाये गए?
23)   केन्द्रीय सूचना आयोग  द्वारा प्रदान किए जाने वाले विभिन्न पुरस्कारों के साथ प्रदान किए जाने वाले स्मृतिचिह्न (मेमेंटो) एवं प्रशस्तिपत्र/प्रमाण-पत्रों पर किस भाषा का प्रयोग किया जाता है, तत्सम्बन्धी आदेश/नियम क्या है?
24)   केन्द्रीय सूचना आयोग के अधीन/ नियंत्रण में आने वाली कितनी वेबसाइटें राजभाषा में उपलब्ध हैं? उनका पता क्या है?
25)   केन्द्रीय सूचना आयोग में कौन-२ से कार्य मूल रूप से राजभाषा में किए जाते हैं, सूचित करें?
26)   मैंने २ नवंबर २०१२ को अपने ईमेल आईडी cs.praveenjain@gmail.com से निम्नलिखित ईमेल आईडी: vijay.bhalla@nic.in, kl.das@nic.in, dhirendra.k@nic.in, tk.mohapatra@nic.in, 
dc.singh@nic.in पर केन्द्रीय सूचना आयोग की हिन्दी वेबसाइट उपलब्ध ना होने की बात उठाते हुए शिकायत की थी, समय-२ पर ६ अनुस्मारक भी भेजे, राजभाषा विभाग ने भी मेरी शिकायत को संज्ञान में लेकर आयोग को पत्र लिखा था. कृपया बताएँ कि क्या मेरा उक्त शिकायती ईमेल / अनुस्मारक एवं राजभाषा विभाग का पत्र आयोग को मिले हैं ? यदि हाँ  तो आयोग ने उस पर अब तक क्या कार्यवाही की है?
27)   आयोग में ऑनलाइन शिकायतों के निपटारे के लिए क्या नियम हैं?
28)   आरटीआई ऑनलाइन (rtionline.gov.in) वेबसाइट कब हिन्दी में शुरू की जाएगी?

आवेदक:


संलग्न: शुल्क हेतु १० रु का भाडाआ (आईपीओ)


बुधवार, 6 मार्च 2013

उपभोक्ता को उसकी अपनी भाषा में जानकारी ना देना अन्याय है


आज भी देश की 98 % जनता अँग्रेज़ी नहीं समझ पाती है ! ग्रामीण व आदिवासियों के लिए तो यह एक अजूबे से कम नहीं है ! जब हिन्दी कदम-दर-कदम भारत की संपर्क भाषा के रूप स्थापित हो चुकी है. बड़ी-छोटी निजी कंपनियों और फर्मों/संस्थाओं द्वारा बेचे जाने वाले हर उत्पाद/सेवा के डिब्बे/पैक आदि पर उत्पाद/सेवा का नाम, मूल्य, निर्माण-अवसान तिथि, उत्पाद सेवा के अन्य सभी विवरण (पोषक तत्व, घटक पदार्थ, इस्तेमाल का तरीका आदि) सबकुछ आज केवल अंग्रेजी में ही उपलब्ध करवाया जाता है जिन्हें पढ़ने-सुनने-समझने के लिए सहायक मिलना चाहिए अन्यथा अंग्रेजी के नाम पर पूरे देश में ग्राहकों को ठगा जा रहा है.

कुछ उदाहरण जहाँ-२ अंग्रेजी के कारण पर ग्राहकों/उपभोक्ताओं को ठगा जा रहा है:

१.    सभी प्रकार की उपभोक्ता वस्तुएँ: साबुन, तेल, नमकीन, बिस्किट, चॉकलेट, शैम्पू आदि-आदि.
२.    सभी निजी बीमा उत्पाद- जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, वाहन बीमा, गृह बीमा आदि.
३.    सभी अन्य वित्तीय उत्पाद- म्युचुअल फंड, निवेश कोष, स्वर्ण ऋण, अन्य स्थायी निक्षेप योजनाएँ, निवेश योजनाएँ, पेंशन कोष आदि.
४.    सभी चिकित्सा उत्पाद एवं औषधियाँ
५.    सभी इलेक्ट्रौनिक उपकरणों के मैनुअल/हस्त-पुस्तिकाएं, गारंटी-वारंटी कार्ड, इस्तेमाल सम्बन्धी निर्देश.
६.    शेयर बाजार सम्बन्धी सब जानकारी एवं शेयरों/सूचीबद्ध कंपनियों की सभी जानकारी केवल अंग्रेजी में मिलती है, निवेशकों के साथ छल का मूलभूत कारण अंग्रेजी है.

उत्पाद/सेवा के डिब्बे/पैक/दस्तावेज/आवेदन फार्म आदि पर सभी जानकारी अपनी भाषा में हो तो काफी समस्याएं कम हो सकती हैं लेकिन विडम्बना है कि भारत सरकार ने देश में उपभोक्ता उत्पाद –सेवा देने वाली कंपनियों और फर्मों/संस्थाओं के कामकाज में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के प्राथमिकता के आधार पर प्रयोग के लिए अनिवार्य कानून नहीं बनाया.

अंग्रेजी कठिन भाषा हैजिसे अच्छी तरह सीखने में समय लगता है। जो लोग अंग्रेजी माध्यम से पढ़े-लिखे हैं या दूसरे क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त हैंउन्हें उपभोक्ता उत्पाद –सेवा की यथेष्ट जानकारी अपनी भाषा में मिलने लगे तो उसमें बुरे क्या है। भारत को छोड़ दिया जाए तो दुनिया के सभी विकसित देशों (जापान, चीन, दुबई, अरब, फ्रांस, इंग्लैण्ड, बांग्लादेश, सिंगापुर, जर्मनी, जिनमें से कई भारत के महानगरों से भी छोटे हैं) में उपभोक्ता उत्पाद –सेवा की यथेष्ट जानकारी समबन्धित देश की भाषा में देना-लिखना-छापना अनिवार्य है.

देश की करीब ६० प्रतिशत जनता हिन्दी भाषी है तथा शेष आबादी हिन्दी समझ सकती है और सीखना चाहे तो 2-3 वर्षो में भाषा पर पूर्ण अधिकार प्राप्त कर सकती है क्योंकि उसके चारों तरफ का वातावरण (बातचीतफिल्मेंटी.वी. आदि) हिन्दी सीखने में सहायक है। गैर-हिन्दी भाषी अधिसंख्य लोगों की मातृभाषा का आधार भी हिन्दी की तरह संस्कृत है अत: वे कम समय में हिन्दी पर अधिकार पा सकते हैं। रही बात इंटरनेट की तो इस माध्यम में तुरंत अनुवाद की सुविधा से अनुवाद की समस्या नहीं के बराबर होगी। 

पर देशभर में फ़ैल रहे निजी कोर्पोरेट्स ने देशी भाषाओं का सफ़ाया करने का बीड़ा उठा रखा है. इनका हर कामकाज सिर्फ अंग्रेजी में ही किया जाता है, वेबसाइट आदि सबकुछ केवल अंग्रेजी में ही उपलब्ध हैं. इनकी सेवाएँ अथवा उत्पाद आप अपनी जोखिम पर खरीदते हैं क्योंकि इनके पास में हिन्दीतमिलकन्नड़, मराठीगुजराती आदि भारत की अपनी भाषाओं का कोई वजूद नहीं हैं. इन भाषाओं का इस्तेमाल केवल ग्राहकों को लुभाने के लिए टीवी आदि के विज्ञापनों के लिए किया जाता है और उसमें भी अंग्रेजी शब्दों को जबरन घुसाया जाता हैहिन्दी अथवा अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ अछूत भाषाओं की तरह गैर-जरूरी रूप से मजबूरी में इस्तेमाल की जाती हैं. यहाँ यह कह देना जरूरी है कि देशभर में हर राज्य में अंग्रेजी को थोपने का काम जारी है. और भारतीय भाषाओं का तो अस्तित्व संकट में है ही उपभोक्ता को भी अंग्रेजी के नाम पर छला जा रहा है.

भारत में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को 'अंग्रेजीके नीचे क्यों रखा जा रहा हैभारत की भाषाओं को दबाकर अंग्रेजी क्यों थोपी जा रही है?