प्रधानमंत्री कार्यालय ने तो बाकायदा प्रधानमंत्री के भाषणों के लिए 'हिंगलिश' को राजभाषा का दर्जा दे दिया, आम आदमी को प्रधानमंत्री के तथाकथित हिंदी भाषणों को पढ़ने के लिए रोमन लिपि और अंग्रेजी भाषा दोनों का ज्ञान अनिवार्य है। प्रमका में प्रमं के भाषण लिखने वाला अधिकारी अंग्रेजी का बहुत बड़ा पैरोकार है, यह बात मैं मनमोहन सिंह के कार्यकाल से अनुभव कर रहा हूं। पिछले पांच साल के भाषण देख लीजिए, सभी हिंगलिश में लिखे जा रहे हैं। पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध ये भाषण वही पढ़ सकता है, जो हिंदी के साथ अंग्रेजी पढ़ना और समझना जानता हो, सिर्फ हिंदी जानने वाले इन भाषणों को पढ़ नहीं सकते हैं।
राष्ट्रवादी सरकार शीघ्र ही हमारे देश का नाम इंडिया घोषित कर दे और भारत नाम पर प्रतिबंध लगा दे तो अचरज ना कीजिएगा। जो काम कांग्रेस ना कर सकी वह काम राष्ट्रवादी सरकार करेगी!
मेक इन इंडिया
डिजिटल इंडिया
स्किल इंडिया
नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ़ इंडिया
माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनैंस एजेंसी
माई गव वेबसाइट
टीम इंडिया
ग्रीन इंडिया
और ऐसे नामों की सूची लम्बी है...



