अनुवाद

रविवार, 24 अगस्त 2014

रेल्वे ने आम जनता की परेशानी को माना, बहुभाषी पोर्टल से करा सकेंगे अपनी भाषा में टिकट


नई दिल्ली। 20 मई 2015 
भारतीय रेल्वे खानपान एवं पर्यटन निगम जल्द ही यात्रियों को हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में में ऑनलाइन रेल टिकट आरक्षित कराने की सुविधा देने जा रही है। अब अंग्रेजी न जानने वाले लोग भी आसानी से आईआरसीटीसी की वेबसाइट से टिकट आरक्षित करा सकेंगे। ज्ञात रहे कि कई भारतीय भाषा सेवी पिछले तीन चार वर्ष से लगातार माँग कर रहे थे कि रेल टिकट की ऑनलाइन सुविधा हिन्दी में उपलब्ध करवाई जानी चाहिए पर अधिकारी इस बात पर ध्यान नहीं दे रहे थे, इस रेल बजट में माननीय रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभु ने घोषणा की थी कि ऑनलाइन टिकट आरक्षण हेतु बहुभाषी पोर्टल बनाया जाएगा जिसमें यात्री अपनी सुविधा के अनुसार भाषा का चयन करके टिकट आरक्षित कर सकेंगे, शुरुआत में इसमें हिन्दी भाषा का विकल्प जोड़ा जा रहा है.
निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इस दिशा में काम चल रहा है। ऐसे में कई लोग चाहकर भी खुद टिकट बुक नहीं करा पाते। इस स्थिति में या तो वे एजेंटों की मदद लेते हैं या फिर उन्हें काउंटर पर जाकर टिकट खरीदना पड़ता है।
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दिनांक: २४ अगस्त २०१४ 

सेवा में, 
केन्द्रीय सूचना अधिकारी, 
रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय 
भारत सरकार 
नई दिल्ली – ११०००१   

विषय : सूचना का अधिकार अधिनियम के अधीन आवेदन 

महोदय,
कृपया निम्नलिखित सूचनाएँ नियमानुसार केवल राजभाषा में प्रदान करने की कृपा करें, अंग्रेजी में प्राप्त उत्तरों के विरुद्ध अपील एवं शिकायतें दर्ज करवायी जाएँगी (*अंग्रेजी=फिरंगी भाषा):

रेल मंत्रालय के अधीन कार्यरत रेलवे बोर्ड एवं आईआरसीटीसी द्वारा राजभाषा की निरंतर उपेक्षा की जा रही है.भारत की राजभाषा हिन्दी है तथा विभिन्न राज्यों की अपनी राजभाषाएँ हैं, भारत में लगभग तीन प्रतिशत लोग अंग्रेजी जानते हैं और सत्तानवे प्रतिशत लोग अंग्रेजी नहीं जानते हैं. यहाँ ध्यान देने योग्य है कि देश कि छप्पन करोड़ जनता की मातृभाषा हिन्दी है और इसके अतिरिक्त लगभग पच्चीस करोड़ लोग हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखते हैं.

इन तथ्यों से पता चलता है कि देश के सत्तानवे प्रतिशत नागरिकों पर अंग्रेजी थोपने की बजाए उन्हें उनकी भाषा में अथवा कम से कम हिन्दी भाषा में दी जानी चाहिए पर ऐसा नहीं हो रहा है उन पर अंग्रेजी थोपी जा रही है. जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते हैं  रेलवे उन्हें ऑनलाइन टिकट सुविधा से १५ वर्षों से जानबूझकर वंचित रख रही है, उनके साथ भेदभाव किया जा रहा. यह सब टिकट दलालों के दवाब में किया जा रहा है वर्ना क्या कारण है जो हिन्दी में ऑनलाइन टिकट निकालने की सुविधा अब तक नहीं दी गई?  रेल यात्रा, गरीब और अमीर सभी करते हैं इसलिए इस सेवा में हिंदी को स्थान ना देना यह साफ़ करता है कि रेलवे को गरीब और आम जनता की ज़रा भी चिंता नहीं है इसलिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा केवल अंग्रेजी में दी गई है ताकि अंग्रेजी ना जानने वाले देश के 97% लोग कभी भी ऑनलाइन टिकट ना निकाल सकें, इन 97% लोगों की कोई सुनवाई नहीं, उनकी परेशानी का किसी को ख्याल नहीं. सारी ऑनलाइन सेवाएँ केवल अंग्रेजी जानने वाले मुट्ठीभर लोगों को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही हैं.

चाही गयी सूचनाएँ:
१. आईआरसीटीसी द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा प्रतीक-चिह्न (लोगो)  केवल अंग्रेजी में बनाया गया है जबकि नियमानुसार इसे हिन्दी में अथवा द्विभाषी रूप में बनाया जाना चाहिए. इस उल्लंघन के लिए कौन ज़िम्मेदार है?

२. रेल मंत्रालय की सभी अंग्रेजी वेबसाइट हमेशा पहले खुलती है और राजभाषा की उपेक्षा करते हुए हिन्दी का विकल्प अंग्रेजी वेबसाइट पर दिया गया है. अंग्रेजी वेबसाइट को प्राथमिकता दी गई है. नियमानुसार वेबसाइट राजभाषा विभाग अथवा पत्र-सूचना कार्यालय की वेबसाइट की तरह १००% द्विभाषी होनी चाहिए ताकि हिन्दी-अंग्रेजी की सामग्री एक साथ प्रदर्शित हो. पूर्व निर्धारित रूप से अंग्रेजी वेबसाइट का पहले खुलना यह दर्शाता है कि रेल मंत्रालय अंग्रेजी को प्राथमिकता देता है. ऐसा करने का निर्णय किसने लिया था, नाम-पदनाम-संपर्क बताएँ? 

३. आईआरसीटीसी की ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा वर्षों से केवल अंग्रेजी में ही उपलब्ध है, ऑनलाइन टिकट बुकिंग का प्रारूप केवल अंग्रेजी में बनाया गया है और उसमें नाम आदि अंग्रेजी में भरना भी अनिवार्य है. ऐसा किस अधिकारी के आदेश से किया जा रहा है? जिसे अंग्रेजी नहीं आती है वो इस वेबसाइट पर ऑनलाइन टिकट किस तरीके से बुक करे, उसके लिए रेलवे ने क्या विकल्प उपलब्ध करवाया है? 
4. बुकिंग के पश्चात् दयाभाव से कम्पनी ने टिकट छापने की सुविधा अंग्रेजी और हिंदी में दी है यानी कि आप अपनी मर्जी से टिकट की भाषा चुन सकते हैं, अंग्रेजी का टिकट तो पूरी तरह से अंग्रेजी में होता है पर हिंदी के टिकट में अंग्रेजी की भरमार है स्थानों के नाम, गाड़ी का नाम, यात्रियों के नाम, शायिकाओं का विवरण, किराया [शब्दों में] आदि केवल अंग्रेजी में ही छपता है. जिसे अंग्रेजी का ज्ञान ना हो वो ऐसे हिंदीटिकट को लेकर भी सहयात्रियों से पूछताछ करता फिरता है. ऐसा हरदिन करोड़ों रेल यात्रियों के साथ हो रहा है. अंग्रेजी का टिकट 100% अंग्रेजी में होता है पर हिंदी का टिकट 100% हिंदी में नहीं दिया जाता. रेलवे ने टिकटों को शत-प्रतिशत द्विभाषी रूप में छापने के लिए क्या कदम उठाए हैं? इसके लिए क्या लक्ष्य है?    
5. आईआरसीटीसी ने टिकट बुकिंग हेतु कौन-२ मोबाइल अनुप्रयोग (एप्प) किस-किस भाषा में बनाए हैं?

6. आईआरसीटीसी ने ई-टिकट सम्बन्धी एसएमएस अलर्ट की सुविधा भी केवल अंग्रेजी में ही उपलब्ध करवाई है, जिसे अंग्रेजी का ज्ञान ना हो वो ऐसे एसएमएस अलर्ट को लेकर सहयात्रियों से पूछताछ करता फिरता है क्योंकि वह उसे पढ़ नहीं सकता, ऐसी परेशानी करोड़ों यात्रियों को प्रतिदिन हो रही है. यह सुविधा हिन्दी में शुरू करने लिए रेलवे ने क्या-२ कदम उठाए हैं? हिन्दी में अलर्ट सुविधा कब शुरू की जाएगी?
7. आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन खरीदारी, हवाई टिकट आरक्षण एवं पर्यटन के लिए भी अलग-२ वेबसाइटों का केवल अंग्रेजी में निर्माण किया है, रेलआहार के प्रतीक-चिह्न में हिंदी को अंग्रेजी से नीचे प्रयोग किया गया है. यह राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का उल्लंघन है, इसके लिए कौन अधिकारी ज़िम्मेदार है?  इस उल्लंघन को रोकने के क्या उपाय किए गए हैं?
8. आईआरसीटीसी द्वारा सभी ईमेल उपयोगकर्ताओं को ई-टिकट सम्बन्धी सभी ईमेल जैसे टिकट आरक्षण, रद्दीकरण,रेलगाड़ी छूट जाने वाले टीडीआर जमा करने सम्बन्धी ईमेल केवल अंग्रेजी में भेजा जाता है जबकि राजभाषा नियमों के अनुसार ऐसे सभी ईमेल द्विभाषी रूप में भेजे जाने चाहिए. आईआरसीटीसी द्वारा ईमेल- पत्र भेजने में राजभाषा सम्बन्धी सभी नियमों और प्रावधानों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और ऐसा वर्षों से चल रहा है. ऐसे ईमेल सिर्फ अंग्रेजी में भेजे जाने का निर्णय कब और किसने लिया था? इस उल्लंघन को रोकने के क्या उपाय किए गए हैं?

९. निम्नलिखित टिकटों पर कंप्यूटर द्वारा 90% विवरण (दो स्टेशनों के नाम को छोड़कर) केवल फिरंगी भाषा में छापा जाता है:
i. आरक्षित कार्ड टिकट 
ii. मुंबई उपनगरीय रेल के टिकट
iii. मासिक/त्रैमासिक पास
iv. स्वचालित मशीन टिकट
v. प्लेटफोर्म टिकट 
इन सभी को १०० % द्विभाषी बनाने के लिए रेलवे ने क्या कार्यवाही की है और कब यह सुविधा मिलने लगेगी?

१०. सामाजिक माध्यमों (ट्विटर एवं फेसबुक तथा यूट्यूब) पर मंत्रालय का परिचय/प्रोफाइल केवल अंग्रेजी में लिखने और ताज़ा जानकारी केवल अंग्रेजी में डालने का निर्णय किसने लिया?

आवेदक  
प्रवीण जैन

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