अनुवाद

बुधवार, 6 मार्च 2013

पत्र-सूचना कार्यालय द्वारा राजभाषा की उपेक्षा एवं हिन्दी में जानकारी/सामग्री के अभाव /अनुपलब्धता के सम्बन्ध में लोक शिकायत


दिनांक: ६ फरवरी २०१३  


प्रति,
लोक शिकायत अधिकारी ,
पत्र सूचना कार्यालय,
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय,
कक्ष क्र. १३०, ए विंग शास्त्री भवन,
डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, नई दिल्ली – ११००१


विषय: पत्र-सूचना कार्यालय द्वारा राजभाषा की उपेक्षा एवं हिन्दी में जानकारी/सामग्री के अभाव /अनुपलब्धता के सम्बन्ध में लोक शिकायत 

महोदय/महोदया,

उपर्युक्त विषयान्तर्गत मुझे निम्नलिखत जानकारी प्रदान करने की कृपा करें:

सूचना तकनीक के इस नये-नवेले दौर में अब जबकि यूनिकोड तकनीक के कारण हिन्दी वेबसाइट बनाना किसी आम आदमी के लिए भी बहुत आसान हो गया है तब भी भारत सरकार की हिन्दी वेबसाइटें अधूरेपन का रोना रो रही हैं. मुंबई के  'हिंदी के योद्धा'  संगठन ने सरकारी साइटों के एक सर्वेक्षण में पाया है कि सरकार द्वारा हिन्दी में बनाई गई कोई भी वेबसाइट पूर्ण नहीं हैंऔर ९५% हिंदी वेबसाइटें तमाम अशुद्धियों से भरी हुई हैं.

अपने सर्वेक्षण के दौरान 'हिंदी के योद्धा' संगठन ने पाया है कि भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पसूका) की वेबसाइट पूरी तरह अपूर्ण है, यह राजभाषा अधिनियम एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३५१ का स्पष्ट उल्लंघन भी है क्योंकि ३५१ कहता है कि संघ का कर्तव्य होगा की वह हिंदी को बढ़ावा दे, हर सरकारी काम काज में हिंदी को प्राथमिकता दी जाए. 
लेकिन पसूका की वेबसाइट देखकर ऐसे लगता है कि हिंदी नहीं बल्कि अंग्रेजी भारत की राजभाषा है इसलिए अंग्रेजी को हर जगह हिन्दी से आगे/ऊपर/पहले रखा गया है और हिंदी तो केवल कुछेक गिनेचुने कामों में इस्तेमाल की जाती है .

पसूका की आधिकारिक वेबसाइट पर जो कमियाँ पाई गई हैं उसका ब्योरा-
·        वेबसाइट के मुखपृष्ठ पर ही हिंदी को अंग्रेजी के ठीक नीचे रखा गया है मानो हिंदी अंग्रेजी से निम्नतर है, यह राजभाषा अधिनियम एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३५१ का स्पष्ट उल्लंघन है इसलिए हिंदी की विज्ञप्तियाँ अंग्रेजी से ऊपर प्रदर्शित होनी चाहिए.
·        प्रधानमंत्री से संबंधित स्तंभ मुखपृष्ठ पर केवल अंग्रेजी में दिखाई देता है उसमें दी गई विज्ञप्ति, तस्वीरें, कैबिनेट निर्णय, मंत्रिमंडलीय आर्थिक कार्य समिति के निर्णय, मंत्रिमंडलीय ढांचागत समिति के निर्णय, विदेश दौरे की सम्पूर्ण जानकारी केवल अंग्रेजी में है, हिंदी में कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं समझी.
·        नवीन दस्तावेज, पृष्ठभूमिक दस्तावेज (पार्श्व सामग्री ) एवं तथ्यसूची/सामग्री के स्तंभ अंग्रेजी में आगे/ऊपर दिए गए हैं जबकि हिंदी में नीचे.
·        नवीनतम फोटो से आगे ‘लेटेस्ट फोटो’ अंग्रेजी में लिखा गया है क्लिक करने पर हरेक छायाचित्र की जानकारी केवल अंग्रेजी में ही दिखाई देती है. राजभाषा हिंदी को कोई स्थान नहीं मिला.
·        इसी तरह पसूका अधिकारियों से संपर्क (कांटेक्ट पीआईबी ऑफिसर्स), मीडियाकर्मी कोना [मीडिया पर्सन्स कॉर्नर], नवीनतम सूचना रेखाचित्र [लेटेस्ट इन्फोग्राफिक्स], ताज़ा वेबकास्ट, प्रत्यायन [एक्रिडेशन], प्रतिक्रिया[फीडबैक], विज्ञप्तियाँ प्राप्त करें [सबस्क्राइब रिलीजेज़], आमंत्रण [इनविटेशन] आदि केवल अंग्रेजी में ही बनाए गए हैं, इस सभी श्रेणियों में हिंदी को कोई स्थान नहीं.  आप हिंदी यूनिकोड में अपनी प्रतिक्रिया, नाम-पता आदि नहीं लिख सकते आपको अंग्रेजी में लिखना अनिवार्य है.
·        विज्ञप्तियाँ प्राप्त करें [सबस्क्राइब रिलीजेज़],के फॉर्म में अंग्रेजी में ही सबकुछ भरना होगा और उसके बाद आपको विज्ञप्तियाँ भी केवल अंग्रेजी में ही प्राप्त होंगी. हिंदी में विज्ञप्तियाँ आप प्राप्त नहीं कर सकते.
·        उन्नत खोज (एडवांस्ड सर्च), शीघ्र खोज (क्विक सर्च) भी अंग्रेजी में बनाए गए टैब है  और उनमें केवल अंग्रेजी शब्द ही खोजे जा सकते हैं हिंदी में खोज करना मना है.
·        अंग्रेजी के ‘अबाउट अस’ एवं ‘इन्फोर्मेशन अंडर आरटीआई एक्ट’ हिंदी के ‘हमारे बारे में’ एवं ‘सूचना का अधिकार से आगे हैं अर्थात भारत की राजभाषा पीछे है.
·        अंग्रेजी के ‘अबाउट अस’ के अंदर ७ अलग-२ टैब  हैं जबकि हिंदी के ‘हमारे बारे में’ केवल ३ ही टैब दिए गए हैं.
·        इसी तरह  अंग्रेजी के ‘इन्फोर्मेशन अंडर आरटीआई एक्ट’ के अंदर ८ टैब [
Expand Monthly receipts and disposal of RTI applications
Disclosure Under Section 4 of RTI Act 2005Disclosure Under Section 4 of RTI Act 2005
 दिए गए हैं जबकि हिंदी के ‘सूचना का अधिकार’ में केवल ४ ही टैब [
http://pib.nic.in/newsite/image/bullet1.gifअंतिम अनुदान (गैर-योजना) में निधियों का आबंटन 2007-2008 )
 हैं जो कि २००९ से अद्यतन नहीं किये गए पर अंग्रेजी में यही सब जानकारी पूरी तरह से अद्यतन की गई है.
वेबसाइट पर भारत सरकार की अन्य वेबसाइटों जैसे (भारत का राष्ट्रिय पोर्टल, चुनाव आयोग, मानसरोवर यात्रा, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोक शिकायत, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, लोकसभा, राज्यसभा आदि) की लिंक भी केवल अंग्रेजी में ही प्रदर्शित है और लिंक पर क्लिक करने पर संबंधित अंग्रेजी वेबसाइटें ही खुलती हैं, भारत सरकार की हिंदी वेबसाइटों का प्रचार क्यों किया जाए?
·        पसूका के क्षेत्रीय कार्यालयों (मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद एवं आइज़ोल आदि) की लिंक वेबसाइट पर केवल अंग्रेजी में प्रदर्शित है उनमें से किसी की भी वेबसाइट हिंदी में उपलब्ध नहीं.
·        सामाजिक मीडिया ट्विटर एवं यूट्यूब पर परिचय, बैनर आदि  केवल अंग्रेजी में दिया गया है एवं सारी जानकारी अंग्रेजी में अद्यतन की जाती है/डाली जा रही है, जैसे कि सामाजिक मीडिया पर राजभाषा के प्रयोग पर रोक लगा दी गयी हो.
कृपया बताएं :
१.     पसूका की वेबसाइट की उक्त सभी कमियाँ कितने दिनों में दूर कर ली जाएँगी?
२.     चूँकि भारत की राजभाषा हिन्दी है फिर भी पसूका की वेबसाइट पर हिन्दी को अंग्रेजी से नीचे, पीछे और बाद में रखने का नियम किसने बनाया/निर्णय किसने लिया? राजभाषा अधिनियम एवं संविधान के अनुसार हिन्दी में हर जानकारी अंग्रेजी की जानकारी से ऊपर/आगे/पहले प्रदर्शित होनी चाहिए.
३.     पसूका की वेबसाइट पर सम्पूर्ण अद्यतन/नवीनतम जानकारी की हिंदी में उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस/किन अधिकारी/अधिकारियों की है?
४.     पसूका से संबद्ध सभी शाखाओं एवं क्षेत्रीय कार्यालयों  आदि की पूर्ण अद्यतन आधिकारिक हिन्दी वेबसाइटें भारत की जनता के लिए कितने दिनों में उपलब्ध करवा दी जायेगी?
५.     पत्रकारों/मीडियाकर्मियों को जारी किये जाने वाले पीआईबी कार्ड किस भाषा में जारी किये जाते हैं?
६.     वेबसाइट पर पत्रकारों/मीडियाकर्मियों को जारी किये जाने वाले पीआईबी कार्ड के ऑनलाइन आवेदन फॉर्म (नए, नवीनीकरण, पता बदलाव, संगठन में परिवर्तन के लिए आवेदन ) को कब तक पूर्णरूप से द्विभाषी बना दिया जाएगा?

इस लोक शिकायत के शीघ्र निवारण की अपेक्षा के साथ 

भवदीय 
प्रवीण कुमार जैन


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