अनुवाद

बुधवार, 6 मार्च 2013

डाक विभाग द्वारा राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन एवं अंग्रेजी को बढ़ावा



---------- अग्रेषित संदेश ----------
प्रेषक: प्रवीण जैन <cs.praveenjain@gmail.com>
दिनांक: 20 फरवरी 2013 1:46 pm
विषय: डाक विभाग द्वारा राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन एवं अंग्रेजी को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में लोक शिकायत
प्रति: jsol@nic.in, jsol2-mha@nic.in, sudhir.malhotra@nic.in
प्रति: secy-ol@nic.in, srpps_secyol@nic.in, bhoria@nic.in


प्रति,
राजभाषा विभागगृह मंत्रालय
एनडीसीसी-II (नई दिल्ली सिटी सैंटर) भवन'बी' विंग
चौथा तलजय सिंह रोड़
नई दिल्ली - 110001

विषय: डाक विभाग द्वारा राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन एवं अंग्रेजी को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में लोक शिकायत।

महोदय,

पिछले 6-7 वर्षों से देखने में आया कि  प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा  देने के नाम पर डाक विभाग से हिंदी ग़ायब की जा रही है। इसलिए मैं डाक विभाग द्वारा हिंदी की घोर उपेक्षा किये जाने की शिकायत दर्ज करवा रहा हूँ:

शिकायत के मूल बिंदु:

1. अहिन्दी भाषी राज्यों में डाकघरों में सभी सूचनाएँनिर्देशखिड़की आदि पर नामनागरिक अधिकार-पत्रडाक दरों के सूची-पत्र आदि केवल अंग्रेजी में ही तैयार किये जा रहे हैं।
2. डाक विभाग द्वारा शुरू की गई सभी नयी सेवाओं के नाम भी केवल अंग्रेजी में रखे गए हैं और इन सेवाओं की पहचान के लिए बनाये गए सभी प्रतीक-चिह्न केवल अंग्रेजी में ही बनाये गए हैं। (अनुलग्नक देखें) सभी प्रतीकचिन्ह हिंदी में बनाए  जाएँ।
3. डाक विभाग के वाहनोंलेखन- मुद्रण सामग्री (कार्यालयीन लिफ़ाफ़ेलॉग-पुस्तिकाडाक की बोरियाँ -रजिस्टरतेज़ डाक (स्पीड पोस्ट) केन्द्रों द्वारा इस्तेमाल होने वाली रबर की मुहरें आदि)बड़े शहरों के डाक घरों द्वारा लाल रंग की स्याही वाली डाक घर के नाम/पिन/दिनांक वाली मुहरों (जो प्रत्येक डाक/लिफ़ाफ़े पर इस्तेमाल की जाती है)आदि में केवल अंग्रेजी का इस्तेमाल।
4. डाक विभाग की मूल वेबसाइट http://www.indiapost.gov.in तथा अन्य सभी (डाक मंडलों अथवा सर्कलों की ) वेबसाइटें केवल अंग्रेजी में ही बनाई गई हैं:
डाक विभाग की निम्नलिखित सभी वेबसाइटें केवल अंग्रेजी में बनाई गई हैं
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5. सभी नयी सेवाओं के लिए बुकिंग से संबंधित सभी स्टीकर केवल अंग्रेजी में ही बनाए/छापे गए/जाते हैं  एवं बुकिंग के पश्चात् ग्राहकों को दी जाने वाली सभी  रसीदें भी केवल अंग्रेजी में मुद्रित की जाती हैं। किसी भी सेवा के लिए डाकघरों द्वारा हिंदी में रसीद नहीं दी जाती। सभी स्टीकर केवल हिंदी बनाए जाएँ, रसीदें भी द्विभाषी छापी जाएँ, सॉफ्टवेयर में इसकी व्यवस्था की जाए।
6. डाक में प्रेषकों द्वारा इस्तेमाल किए गए लिफाफों/पत्रिकाओं/कार्डों/पुस्तकों/पार्सलों  आदि पर लाल रंग की स्याही में सीधे छपने 'डाक टिकटोंपर "भारत" शब्द के अलावा सारे विवरण केवल अंग्रेजी में कई साल से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे डाक टिकट पूर्णरूपेण हिंदी में बनाये जाएँ।
7. पंजीकृत डाक एवं अन्य स्पीड-पोस्ट/बिसनेस पोस्ट आदि नयी सेवाओं के डाकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सारे क़ागज़ात केवल अंग्रेजी में ही तैयार किये जाते हैं जिन पर डाकिया महोदय डाक प्राप्तकर्ता के हस्ताक्षर लेता है। ऐसे सारे दस्तावेज द्विभाषी बने जाएँ।


आपसे निवेदन है कि  डाक विभाग को इन सभी शिकायतों को तुरंत दूर करने एवं हिंदी को हर कामकाज में प्राथमिकता देने के निर्देशित किया जाए।

प्रार्थी,
प्रवीण कुमार जैन 

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